झाड़ेली गाँव

 

 झाड़ेली गाँव नागौर जिले के जायल तहसील में

नागौर-लाडनूं रोड NH-58 पर नागौर से 35 km पूर्व

में स्थित है। यंहा धनावंशी स्वामियों के  33 घर हैं ।  

संपर्क सूत्र :-
श्री भींवदासजी भांभू -9799225516
श्री लालदासजी बुगालिया- 99830 08590
श्री कानदास जी तेतरवाल -97847 14365  

नौकरीपेशा :-
अधिकांश लोग खेती से जुड़े हुए हैं । यहां के धन्नावंशी खेती बाड़ी के लिए काफी जाने जाते थे। लेकिन अब ज्यादातर डौली भूमि के अंतर्गत आती है। कुल करीब 800 बिगा में से 500 बिगा डौली भूमि है।  
कुछ लोग सरकारी नौकरी में जैसे कि :
1. भंवरलाल पुत्र श्री गणेश दासजी बुगालिया जलदाय विभाग पीलीबंगा में कार्यरत्त
2.  रामनिवास पुत्र श्री गुकुल दास जी तेतरवाल, लेक्चरर govt स्कूल झाड़ेली
3.  दिनेश पुत्र श्री कानदास जी तेतरवाल, स्टेशन मास्टर मुम्बई, भारतीय रेल
4.  दिनेश पुत्र श्री भंवरलाल बुगालिया, nursing officer AIIMS जोधपुर

कुछ लोग प्राइवेट क्षेत्र में है जैसे कि:
1. प्रेम दास पुत्र स्व. श्री देवदासजी भांभू, Sr. Engineer at Samsung Engineering , Noida, दिल्ली
2.  ओम प्रकाश पुत्र श्री भींवदास जी भाम्भू , BPO  US based , दिल्ली
3.  राम पुत्र भंवरलाल भाम्भू, जूनियर इंजीनियर अजमेर  

इनके अलावा ज्यादातर यूवा वर्ग बाहर काम कर रहे या फिर कुछ लोग अपना निजी व्यवसाय करते हैं।  

जनसंख्या :-
झाड़ेली में भांभू - 4 घर, बुगालिया - 17 घर, तेतरवाल- 9 घर है । संख्या में बात करे तो भाम्भू करीब 22, बुगालिया 93 व तेतरवाल करीब 47 लोग हैं। कुल 162 जनसंख्या हैं।  

 

मंदिर:-
यहां ठाकुर जी का काफी पुराना मंदिर है जिसका पिछले साल पूरे गाँव के सहयोग से बहुत ही भव्य मन्दिर का निर्माण हुआ।  

पुराने मंदिर का निर्माण ठा. रणजीत सिंह जी ने सम्वत 1920 माघ सुदी  पंचमी ( सन 1863 ) के दिन नीव भरकर शुरू करवाया था।  
मंदिर के एक वर्ष उपरांत सम्वत 1921  ( सन 1864 ) में झाड़ेली गढ़ का निर्माण शुरू हुवा था। 
नए मंदिर के निर्माण की नीव सम्वत 2075  चैत्र बद्दी दूज (3  मार्च 2018 ) में ठा. हेमसिंह जी , ठा जुगलसिंह व् समस्त गांववासियो 
की उपस्थिति में हुई ।

 

इतिहास:-  
यहां पर सबसे पहले एक तेतरवाल परिवार था। उसमें गिरधारीदासजी व सांवल दासजी थे। गिरधारीदासजी के सिर्फ 7 पुत्रियां थी। कोई पुत्र न होने की वजह से वृद्धावस्था में उनकी देख भाल के लिए उनकी 5 पुत्रियां अपने पतियों के साथ यहां झाड़ेली में ही रहने लग गयी थी। इसकी दूसरी वजह यहां अच्छी खेती होनी थी। उनमें से स्व. श्रीमती पेमीदेवी जो कि सुनारी भाम्भू परिवार में स्व. श्री हरिदास जी के साथ परणाई हुई थी वह अपने पति के साथ यंहा आ गयी थी। उनकी ही संतान श्री भिन्वदास एवम श्री स्व. देवदास जी के परिवार यहां है। इनके साथ स्व. श्रीमती मोहनी देवी भी अपने पति स्व. श्री मूल दासजी भांभू , सुनारी के देहांत के बाद अपनी बहन के साथ यह्नी रहने लगी। इनके सिर्फ 2 पुत्रियां ही थी इसलिए इन्होंने  भींवदास जी को अपने पुत्र स्वरूप ही माना। इसके अलावा स्व. श्रीमती धनिदेवी के पति स्व. श्री बद्रीदासजी भांभू सुनारी की शादी के कुछ ही साल बाद स्वर्गवास होने से वह अपने पिता के घर ही रहने लगी।

बाकी 2 बहने स्व. श्रीमती धापी देवी पत्नी स्व. श्री खूमदास जी बुगालिया सारंगसर तथा स्व. श्रीमती हीरा देवी पत्नी स्व. श्री धुंकल दासजी बुगालिया सारंगसर भी यहां झाड़ेली में ही रहने लग गये। इनके साथ स्व. श्री माधोदास जी जो कि खूमदास जी के भाई थे वह भी यहां आकर बस गए। अभी सारे बुगालिया इन तीन के ही वंशज हैं।  

सांवल दास जी के पुत्र स्व. श्री नारायणदास जी थे जिनके पुत्र श्री लालदास तेतरवाल है जो यंहा झाड़ेली से जसवंतगढ़ जाकर बस गए हैं।  स्व. श्री नानूराम जी तेतरवाल गाँव सिंथल(नापासर, बीकानेर)  से यंहा आकर बसे थे। अभी जो झाड़ेली गाँव में तेतरवाल है वे इन्ही के वंशज हैं। मंदिर की पूजा श्री गुकुलदासजी तेतरवाल कर रहे हैं जो इनके पौत्र हैं।

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