247378273_10226571383053533_2611330605267312724_n.jpg

धन्नावंशी स्वामी सम्प्रदाय जिसकी श्री रामानंदाचार्य से दीक्षित श्री धन्नाजी महाराज ने 15वी सदी में स्थापना की थी । धन्नावंशी स्वामी काफी अन्य नामों से भी जाना जाते हैं जैसे कि स्वामी, साद, वैष्णव, वैरागी, संत, पुजारी ।  इस वेबसाईट के माध्यम से समाज के इतिहास की जानकारी के साथ-साथ समाज के संस्थागत इतिहास का भी ब्यौरा दिये जाने का प्रयास किया जा रहा है । धन्नावंशी स्वामी समाज में कहां-कहां संगठन कार्यरत है राष्ट्रीय, प्रान्तीय, जिले, तहसील एवं स्थानीय स्तर के संगठन कहां-कहां है उनके अध्यक्ष, महासचिव/सचिव एवं कोषाध्यक्ष कौन-कौन है, वैष्णव समाज के भवन, जिसमें छात्रावास, समाज भवन, स्कूल भवन, धर्मषाला/विश्राम गृह एवं मन्दिर इत्यादि जहां है उनका सचित्र ब्यौरा, समाज की समाजिक पत्र-पत्रिकाएं कहां-कहां से निकलती है, समाज संस्थाओं / समितियों द्वारा आयोजित विभिन्न आयोजनों की तुरन्त एवं ताजा जानकारी आपको इस वेबसाईट पर उपलब्ध करवाये जाने का प्रयास किया जा रहा है । 

धर्म की व्यापकता के दृष्टिकोण से संप्रदायों की संस्थापना और अनुयायीजनों की वृद्धि के फलस्वरूप पंद्रहवीं शताब्दी का समय भक्तिकाल कहलाया। इस काल के कुछ संप्रदायों ने जातिगत रूप भी धारण किया। धन्नाजी महाराज ने अपने धन्नावंशीय संप्रदाय के अनुयायियों को अपना जातीय रूप कायम रखने की छूट दी। धन्नावंशी समाज की ही भांति बाद के संप्रदायों में बिश्नोई, जसनाथी, निरंजनी जैसे अनेक संप्रदायों में भी जातिगत रूप मौजूद रहा। धन्नाजी महाराज ने अपने वैरागीजनों को भक्ति मार्ग के 21 सूत्र प्रदान किए थे। यह परंपरा बाद में अन्य संप्रदायों ने भी ग्रहण की।

धन्नावंशी संप्रदाय की स्थापना के लिए धन्नाजी को उनके गुरु महाराज श्री रामानंदजी ने आग्रहपूर्वक आज्ञा प्रदान की। स्वामी रामानंदजी चाहते थे कि धन्नाजी अपनी जाति में वैष्णवता का संप्रसार करे। धन्नाजी ने अपने गुरुदेव की आज्ञा को शिरोधार्य किया और धन्नावंशी समाज की स्थापना के निमित्त उत्तरी राजस्थान नागौर क्षेत्र के उन गांवों का चयन किया जहां तत्कालीन उदार शासक मोहिलों (चौहान राजपूत) का राज्य था। संवत 1532 के चैत्र मास की रामनवमी के दिन उन्होंने स्वजातीय कालेरा नख के एक परिवार को शालग्राम शिला प्रदान कर धन्नावंशी समाज की स्थापना की। उनके हाथों प्रदान किया, वह पवित्र शालग्राम आज भी फिरवांसी के प्राचीन शालग्रामजी मंदिर में ठाकुर विग्रह के रूप में सुपूजित है। इसके बाद कई वर्षों तक बहुत सारे परिवार धन्नावंशी समाज से जुड़े और भक्ति का मार्ग अपनाया।

246197840_10226571348292664_4278207531533268293_n.jpg

OUR MISSION (हमारा लक्ष्य)

 हमारे इस धन्नावंशी समाज के कुछ विचारणीय विषय हैं--जिन पर  हमें चिंतन करना है--लिखना है--अमल में लाने का सक्रिय प्रयास करना है। 

1~ धन्नावंशी आध्यात्मिक चेतना  

2~ धन्नावंशी धार्मिक आचार  

3~ धन्नावंशी समाज में व्यसन मुक्ति  

4~ धन्नावंशी समाज की ऐतिहासिक धारणाएं  

5~ धन्नावंशी समाज की पौराणिक मान्यताएं  

6~ धन्नावंशी समाज के महंत द्वारे  

7~ धन्नावंशी महंत द्वारों की वर्तमान स्थिति  

8~ धन्नावंशी संस्थाओं के क्रियाकलाप  

9~ धन्नावंशी समाज की सांगठनिक आवश्यकता  

10~धन्नावंशी समाज के सामाजिक रीति-रिवाजों में परिवर्तन की कितनी आवश्यकता  ? 

11~धन्नावंशी समाज में धार्मिक नव प्रचारकों की आवश्यकता  

12~ क्यों आवश्यक है धन्नावंशी जनगणना  ? 

13~ कैसे समझें डोळी मुद्दे को  

14~ डोळी मुद्दे का सर्वमान्य हल कैसे संभव  ? 

15~ धन्नावंशी युवा अपने कैरियर के प्रति किस प्रकार सचेष्ट बनें ? 

16~ धन्नावंशी युवाओं का सार्वभौम उत्थान  

17~ धन्नावंशी मंदिरों के नव उत्थान की  चेष्टा

 19~धन्नावंशी समाज का आर्थिक परिदृश्य  

20~ धन्नावंशी समाज का सामाजिक एक्य कैसे संभव  ? 

21~क्यों आवश्यक है धन्नावंशी केन्द्रीय संस्था की ?

22~ धन्नावंशीय मर्यादाएं कितनी आवश्यक  

23~ धन्नावंशी संतों महंतों की जीवनी पर लेख  

24~ धन्नावंशी समाज के उदार दानी, सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर सचित्र लेख । 

25~ कितनी आवश्यक है धन्नावंशी समाज में राजनीतिक चेतना  

26~ धन्नावंशी समाज में वैवाहिक अट्टा- सट्टा कितना घातक है  

27~ वैवाहिक नव सोच  

28 औसर एवम् ओढावणी पर प्रतिबंध कितना आवश्यक  

29~ शोक निवारण का नव विधान  

30~ दहेज मुक्त विवाह क्यों आवश्यक 

31~ धन्नावंशी युवा संगठन की आवश्यकता  

32~ धन्नावंशी महिलाओं में अधिकार चेतना  

33~ धन्नावंशी वैवाहिक शिथिलता कितनी घातक  

34~ कितनी आवश्यक नव महंतों और परिव्राजकों की  

35~ पंथ प्रवर्तक धन्नाजी महाराज के मंदिरों की स्थापना कितनी जरूरी  

36~ धन्नावंशी महासभा की संस्थापना  

37~ हर तहसील स्तर पर धन्नावंशी सभाओं की स्थापना  

38~ तहसील स्तर पर धन्नावंशी भवनों का होना कितना आवश्यक  

39~ प्रवासी धन्नावंशी करे वर्ष में दो स्नेह मिलन समारोह  

40~ धन्नावंशी साहित्य सृजन कितना जरूरी  

41~ धन्नावंश सम्प्रदाय की अवधारणाओं से हर धन्नावंशी का परिचय  

42~ जनगणना के विस्तृत आंकड़ों का स्टेटिक विवरण  

43~ महंत प्रशिक्षण क्यों आवश्यक  

44~ धन्नावंशी युवक-युवतियों का धार्मिक लगाव कैसे बढे  

45~ हर वर्ष पंथ में धार्मिक प्रसार के लिए क्या योजना बने । 

45~ महंत द्वारों तथा उनकी संपदा का संरक्षण कितना आवश्यक  

46~ धन्नावंशी विद्यार्थियों के लिए गुरुकुल कितना आवश्यक  

47~ धन्नावंशी स्वामी समाज में वैष्णव आचारों की अनिवार्यता क्यों  

48~ धन्नावंशीय समाज आपदा कोष की आवश्यकता  

49~ धन्नावंशी के प्रयोजनीय व्रत । 

50~ कितने जरूरी धन्नावंशी स्वामी समामें परिचय सम्मेलन ।

51~धन्नावंशी युवा आचरण संहिता ।  

 आप सभी से निवेदन है की आप के पास यदि हमारे समाज के इतिहास , मंदिरो, महंतद्वारो, संस्थाओ, हमारे समाज की जनसंख्या या अन्य कोई भी जानकारी जो हम सब के लिए जरूरी हो वो हमें भेजिए। हम उस जानकरी को जल्दी से जल्दी इस वेबसाइट पर प्रकाशित करेंगे। ईमेल या 9350308314  whatsApp पर भेज सकते है ।